आयात एवं निर्यात किये जाने वाले माल की निकासी के प्रावधान समझाइये | Explain the provisions relating to clearance of imported and exported goods

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आयात एवं निर्यात किये माल की निकासी प्रक्रिया Clearance Procedure of Goods

आयातित या निर्यातित माल की निकासी के सम्बन्ध में प्रावधान निम्न हैं –

(1) घरेलू उपयोग के लिए माल की निकासी Clearance Procedure for Home Consumption

घरेलू उपयोग के लिए आयातित माल की सीधे निकासी के प्रावधान निम्न प्रकार हैं

(1) निकासी का आदेश देना- घरेलू उपयोग के लिए आयात किया हुआ माल प्रतिबंधित माल नहीं। है तथा आयातकर्ता ने उस पर लगने वाले सभी शुल्कों का भुगतान कर दिया है तो सम्बन्धित अधिकारी घरेलू उपयोग के माल की निकासी का आदेश जारी कर देगा।

(2) देय शुल्क न देने की दशा में ब्याज-यदि आयातकर्ता शुल्क के भुगतान हेतु प्रवेश बिल लौटाने के तिथि से 7 दिनों के भीतर आयात शुल्क का भुगतान नहीं करता है तो उसे ऐसे देय शुल्क पर ब्याज देना होगा जो 20% से कम नहीं होगा तथा 30% वार्षिक से अधिक नहीं होगा। इसका निर्धारण समय-समय पर बोर्ड द्वारा किया जाएगा।

(3) कस्टम क्षेत्र से माल बाहर होना-घरेलू उपयोग के लिए आयातित माल का परीक्षण करने के पश्चात् यह सत्यापित किया जाता है कि आयात पर प्रतिबंध नहीं है तथा सीमा शुल्क चुकाने के बाद कस्टम अधिकारी आदेश जारी करेगा। कस्टम क्षेत्र से माल केवल ऐसे आदेश की प्राप्ति के बाद ही निकाला जा सकता है।

(4) जब्ती पर प्रतिबंध- कस्टम अधिनियम के सभी मामलों में यह आदेश है कि आयात प्रतिबंधित नहीं है तथा जब तक अपीलीय सत्ता द्वारा अपील में आदेश को अस्वीकार नहीं कर दिया जाता है तो ऐसे माल को जब्त भी नहीं किया जा सकेगा।

(2) निर्यात के लिए गोदामित माल की निकासी Clearance of Warehouse Goods for Export

किसी भी गोदामित माल को शुल्क का भुगतान किए बिना भारत के बाहर किसी भी स्थान को निर्यात किया जा सकता है यदि निम्नलिखित शर्तों की पूर्ति की गई हों

(1) जहाजी बिल या निर्यात बिल की प्रस्तुति- निर्धारित फार्म में जहाजी बिल या निर्यात बिल को प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

(2) शुल्क एवं अन्य देय राशियों का भुगतान कर दिया गया हो-ऐसे माल के सम्बन्ध में देय निर्यात शुल्क, शस्तियों, किराया, ब्याज तथा अन्य व्ययों का भुगतान किया चुका हो।

(3) अधिकारी द्वारा आदेश-निर्यातीकरण के लिए गोदामित माल की निकासी का आदेश उचित अधिकारी द्वारा दिया जा चुका है।

(4) शुल्क भुगतान का आदेश देना- यदि केन्द्रीय सरकार को शंका होती है की गोदामित माल की तस्करी होना संभव है तो यह राजपत्र में अधिसूचना जारी करके आदेश दे सकती है कि ऐसे माल का निर्यात बिना शुल्क भुगतान किए बिना नहीं किया जा सकता है अथवा कुछ शर्तों एवं प्रतिबंधों के द्वारा ऐसे माल का निर्यात किया जा सकता है।

(5) नेपाल, बर्मा तथा भूटान के सम्बन्ध में प्रतिबंध- गोदामित माल को भूटान, बर्मा व नेपाल में निर्यात करना प्रतिबंधित है। परन्तु अपवाद के रूप में यह कहा गया है कि यदि स्वतंत्र रूप से पूर्ण परिवर्तनीय मुद्रा में भुगतान किया जाता है या विश्व बैंक, एशिया विकास बैंक आदि द्वारा वित्त प्रबंधित किसी योजना के लिए पूँजीगत माल का निर्यात किया जाता है तो नेपाल को निर्यात हो सकता है।

(6) प्राकृतिक हानि के कारण मात्रा में कमी की छूट-केन्द्रीय सरकार द्वारा ऐसे माल के सम्बन्ध में छूट दी जा सकती है जिसकी मात्रा में कमी प्राकृतिक कारणों से हो। यह छूट डिप्टी कमिश्नर द्वारा स्वीकृत की जाती है। ऐसी न्यूनता पर शुल्क उप आयुक्त छोड़ सकता है।

(7) गोदाम से माल बाहर ले जाना-गोदाम में रखा कोई भी माल गोदाम से बाहर नहीं ले जाया जा सकता जब तक कि घरेलू उपयोग या पुनः निर्यात हेतु निकासी न की जाए या माल किसी अन्य गोदाम को न ले जाया जाये अथवा अधिनियम में अन्यथा व्यवस्था न हो।

 

(3) डाक द्वारा आयातित माल की निकासी Clearance of Import by Post

जब माल डाक द्वारा आयात अथवा निर्यात किया जाता है तो ऐसे आयातित या निर्यातित माल की निकासी के प्रावधान निम्नलिखित हैं

(1) माल के साथ संलग्न लेबल या घोषणा को प्रविष्टि मानना- जब माल डाक द्वारा आयात या निर्यात किया जाता है तो उस माल के साथ संलग्न लेबल या घोषणा जिसमें माल का विवरण, मात्रा एवं मूल्य लिखा होता है को आयात-निर्यात के लिए प्रविष्टि माना जाता है।

(2) शुल्क की दर का निर्धारण एवं टैरिफ मूल्यांकन- यदि डाक के द्वारा कोई माल आयात किया गया है तो जिस दिन शुल्क निर्धारण के उद्देश्यों के लिए ऐसे मालों के विवरण वाली सूची डाक अधिकारियों के द्वारा उचित अधिकारी को प्रस्तुत की जाती है उस दिन ऐसे माल पर लागू शुल्क की दर एवं प्रशुल्क मूल्य लिया जाएगा। यदि डाक द्वारा निर्यात किया जाता है तो ऐसे माल पर लागू शुल्क की दर और टैरिफ मूल्य उस दिन का होगा जिस दिन निर्यातकर्त्ता ने ऐसे माल को निर्यातकरण के लिए डाक प्राधिकारियों को सौंपा है।

(3) डाक द्वारा आयात या निर्यात किए गए माल से सम्बन्धित नियम- सीमा शुल्क का केन्द्रीय बोर्ड डाक के द्वारा आयात य निर्यात किए गए माल के सम्बन्ध में नियम बना सकता है। इन नियमों में आयात व निर्यात किए गए माल का प्रविष्टि फार्म, विधि, लेबल या घोषणा से माल का विवरण, मात्रा व मूल्य, माल का परीक्षण, शुल्क निर्धारण व निकासी आदि नियम की व्यवस्था आती है।

(4) डाकपाल द्वारा दिए जाने वाले विवरण- पोस्टल पार्सलों को बिना सीमा शुल्क चुकाए बन्दरगाह, हवाई अड्डे से सरकारी डाकघर के विदेशी पार्सल विभाग जाने दिया जाएगा। जहाँ पर पोस्टमास्टर सीमा शुल्क के मुख्य मूल्यांकक को सूचना प्रस्तुत करेगा जिसमें पार्सलों की संख्या का विवरण, घोषणा-पत्र, रवानगी नोट्स, तथा अन्य अपेक्षित सूचनाएँ शामिल हैं।

(5) पोस्ट पार्सल पर शुल्क मुक्ति- ऐसे पोस्टल पार्सल जिन पर कस्टम शुल्क ₹100 से कम देय है पूर्णरूप से शुल्क मुक्त होते हैं। भारत में भेजे गए पोस्ट पार्सल जो बिना सुपुर्दगी के वापस लौट आए हैं शुल्क से मुक्त होंगे यदि उस पर निर्यात लाभ नहीं उठाया गया है।

(6) पोस्ट पार्सलों पर लगाए जाने वाले लेबल- पार्सलों वाले बक्सों एवं थैलों पर पोस्टल पार्सल, पार्सल मेल तथा लेटर मेल आदि के लेबल लगाए जाते हैं।

(7) पोस्ट पार्सलों को उतारे जाने के निर्धारित स्थान- पोस्ट पार्सलों को विदेशी पोस्ट पार्सल विभागों में कोलकाता, चेन्नई, मुम्बई, दिल्ली, जयपुर, त्रिची, वाराणसी, आसाम आदि स्थानों पर उतारे जाने की आज्ञा दी गई है जहाँ पर पोस्ट पार्सलों को उतारकर प्राप्त किया जा सकता है।

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